आवारा कुत्तों से परेशान रोमानिया
१२ अक्टूबर २०१३पिछले ही महीने राजधानी बुखारेस्ट में आवारा कुत्तों ने एक चार साल के बच्चे की जान ले ली. इस मामले से देश में ऐसा हल्ला मच कि सरकार को जल्दबाजी में एक नया कानून पारित कर देना पड़ा. पर यह कानून सरकार के गले की हड्डी बन गया है.
कानून के तहत नगर पालिका अधिकारियों को लाखों की संख्या में आवारा कुत्तों को मारने की अनुमति होगी. इस कानून ने केवल देश में ही नहीं बल्कि दुनिया भर पशु अधिकार कार्यकर्ताओं को सकते में ला दिया.
यूरोप के लिए शर्मिंदगी
विरोध के कारण इस कानून में बदलाव किया गया है. सरकार का कहना है कि आवारा कुत्तों को पहले 'डॉग्स होम' में भेजा जाएगा. फिर 14 दिन तक अगर कोई कुत्ते को अपनाने नहीं आता है तो कुत्ते को मार दिया जाएगा. लेकिन इसका भी खासा विरोध हो रहा है. अब तक कुत्तों को सिर्फ तभी मारा जाता था अगर वे बहुत आक्रामक हों या फिर बीमार हों.
पिछले हफ्ते राजधानी बुकारेस्ट में इस कानून का काफी विरोध हुआ. आसपास के देशों से पशु कार्यकर्ताओं ने भी इनमें हिस्सा लिया. जर्मनी की डिजाइनर और एक्टिविस्ट माया फॉन होहेनत्सॉलेर्न ने डॉयचे वेले से बातचीत में कहा कि "रोमानिया यूरोप के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गया है".
बुखारेस्ट में पशुओं के लिए काम करने वाले संगठन 'फोर पॉज' की कुकी बारबुसीनू ने डॉयचे वेले से बातचीत में जोर दे कर कहा कि अब तक सरकार की तरफ से आवारा कुत्तों को बड़ी संख्या में मारा नहीं गया है. लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि कानून बनने के बाद से कई लोग खुद ही कुत्तों की जान ले चुके हैं.
सड़कों पर कुत्तों का राज
रोमानिया में लाखों आवारा कुत्ते हैं. इनमें से करीब 65,000 तो राजधानी बुखारेस्ट में ही हैं. कुत्तों के लोगों को काटने के मामलों को देखते हुए बुखारेस्ट में संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए काम करने वाले संस्थान ने इस साल रेबीज के खिलाफ टीकाकरण अभियान चलाया. पिछले साल कुत्तों के काटने के 16,000 मामले सामने आए थे.
लोग इन कुत्तों से इतने परेशान हैं कि लेखक इउलियन लेका ने एक न्यूज वेबसाइट पर लिखा, "आवारा कुत्तों ने रोमानिया की सड़कों पर कब्जा कर लिया है. खास तौर से रात को तो कुत्तों का ही राज होता है, उनका नहीं जिन्हें सरकार रखवाली करने के लिए तनख्वाह देती है."
सितंबर में चार साल के बच्चे की मौत का मामला अकेला नहीं है. 2010 में एक रिटायर्ड व्यक्ति की भी इसी तरह मौत हुई. इस घटना के दो महीने बाद एक छह साल के बच्चे की मौत की खबर आई. 2011 में एक कूड़ा छांटने वाली महिला पर कुत्तों ने हमला कर दिया. तीन दिन तक अस्पताल में रहने के बाद उसकी मौत हो गयी. इस से पहले 2006 में जापान के एक सैलानी की भी कुत्ते के काटने से मौत हो गयी थी.
यह समस्या सिर्फ रोमानिया की ही नहीं है. आसपास के देश यूक्रेन, बुल्गेरिया और सर्बिया में भी हाल ऐसा ही है. 2012 में जब यूक्रेन में फुटबॉल के यूरोकप का आयोजन होना था तब वहां भी इसी तरह का कानून पारित किया गया था. लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते वहां ऐसा नहीं किया गया.
इसके बाद सरकार ने जानवरों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाए और कीयेव, लेवीव और ओडेसा जैसे बड़े शहरों में आवारा कुत्तों की नसबंदी की गया. 'फोर पॉज' के गाब्रिएल प्राउन इसे एक अच्छा विकल्प मानते हैं. वह बताते हैं कि नसबंदी के बाद कुत्ते कम आक्रामक हो जाते हैं और उन्हें एक बार फिर सड़कों पर छोड़ा जा सकता है.
रोमानिया में भी इस तरह की मुहिम चलाने की कोशिश की गयी है. लेकिन भ्रष्टाचार के कारण पैसा सही काम में लगने की जगह कुछ लोगों की जेबों में पहुंच गया. इस बीच डॉग्स होम की संख्या बढ़ाने पर भी बात चल रही है, ताकि कुत्तों की जान लेने की जगह, उन्हें एक सुरक्षित जगह पहुंचाया जा सके.
रिपोर्ट: केनो वेरसेक/आईबी
संपादन: आभा मोंढे