भारत के सबसे बड़े घोटाले की सुनवाई शुरू
२८ नवम्बर २०११शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा का झटका देते हुए सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की. राजा ने अदालत से मांग की थी कि गवाहों से जिरह की जाए. विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने इस दलील को ठुकरा दिया. पहले दिन अभियोजन पक्ष की तरफ से रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के उपाध्यक्ष आनंद सुब्रह्मण्यम की गवाही दर्ज की गई. सुब्रह्मण्यम के अलावा रिलायंस और डीबी टेलीकॉम के अधिकारियों को भी अदालत ने बुलाया.
सबसे पहले बलवा
अपनी पहली सूची में सीबीआई ने 28 लोगों के नाम दिए हैं, जिनकी इसी महीने अदालत में गवाही होनी है. 28 में से 11 गवाह अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (रिलायंस एडीएजी) के हैं. इससे लगता है कि सीबीआई पहले रिलायंस टेलीकॉम और स्वान टेलीकॉम को प्रमोट करने वाले शाहिद उस्मान बलवा के खिलाफ लगे आरोपों का निपटारा करना चाहती है.
2जी घोटाले में अदालत राजा और कनिमोड़ी के अलावा रिलायंस एडीएजी के मैनेजिंग डायरेक्टर गौतम दोषी, ग्रुप प्रेजीडेंट सुरेंद्र पिपरा, सीनियर वाइस प्रेजीडेंट हरि नायर और शाहिद उस्मान बलवा शामिल हैं. इनके अलावा यूनिटेक लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय चंद्रा, डीबी रियलिटी के एमडी विनोद गोएनका, कालैग्नार टीवी के एमडी शरद कुमार और बॉलीवुड फिल्म निर्माता करीम मोरानी के खिलाफ भी अदालत आरोप तय कर चुकी है. पूर्व दूरसंचार सचिव, राजा के पूर्व निजी सचिव और कई अन्य कंपनियों के अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों की भी सुनवाई होगी.
कितनी सजा
सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निरोधी कानून की कई धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं. इनमें साजिश रचने, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज बनाने और पेश करने, आधिकारिक पद का दुरुपयोग करने, रिश्वत लेने और जनसेवक के द्वारा गलत आचरण करने धाराएं हैं. जो भी आरोपी दोषी करार दिया जाएगा उसे कम से कम छह महीने से लेकर आजीवन कारावास की सजा होगी.
केंद्रीय महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट के मुताबिक 2जी घोटाले से भारत सरकार को 176 अरब रुपये का नुकसान हुआ. राजा पर आरोप हैं कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए 2जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस औने पौने दाम में बेच दिए. लाइसेंस देने के लिए नियम बदले गए, जिससे कुछ बड़ी कंपनियों को नुकसान हुआ और घोटाले में फंसी कई नई और दुधमुंही कंपनियों के वारे न्यारे हो गए.
रिपोर्ट: पीटीआई/ओ सिंह
संपादन: वी कुमार