"लीबिया में सुरक्षा बलों और विद्रोहियों ने किए युद्धापराध"
२ जून २०११संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद ने अपने एक बयान में कहा, "जांच आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि लीबिया की सरकारी सेना ने मानवता के खिलाफ अपराध और युद्धापराध किए हैं. आयोग को कुछ ऐसी भी रिपोर्टें मिली हैं जिससे साबित होता है कि विद्रोहियों ने भी युद्धापराध किए हैं." मानवाधिकार परिषद ने अपने एक जांच दल को लीबिया भेजा ताकि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के उल्लंघन के आरोपों की जांच की जा सके.
पेश हुए सबूत
जांच कमीशन ने अपनी रिपोर्ट बुधवार को जिनिवा में मानवाधिकार परिषद को सौंप दी. लीबिया में 350 लोगों से बात करने, कई तस्वीरों और वीडियो को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने के बाद ही रिपोर्ट को तैयार किया गया है. जांच के दौरान ताकत का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल, हिरासत में मौतों, यातना, अभिव्यक्ति की आजादी के उल्लंघन, यौन हिंसा और आम लोगों के खिलाफ हमलों के आरोपों की जांच की गई. यूएन ने अपने बयान में मानवाधिकार कानूनों के उल्लंघन पर चिंता जताई है और दोनों पक्षों से मानवाधिकारों को पालन करने की अपील की गई है.
हिंसा में हजारों की मौत
लीबियाई नेता कर्नल मुअम्मर गद्दाफी पर आरोप है कि उनकी सेना ने योजनाबद्ध तरीके से आम लोगों पर हमले किए. जांच दल को ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे साबित होता है कि गद्दाफी के सुरक्षा बलों ने विरोध प्रदर्शन के शुरुआती दिनों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जबरदस्त ताकत का इस्तेमाल किया. सरकारी बलों ने कई मामलों में घायलों को अस्पतालों में भर्ती होने से रोका और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में यातनाएं दी.
जांच दल का कहना है कि सरकारी अधिकारियों, विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं को आशंका है कि लीबिया में हिंसा के दौरान 10 से 15 हजार लोगों की मौत हुई है. यूएन ने दोनों पक्षों से आग्रह किया है कि मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की जांच हो और पीड़ितों को हर्जाना दिया जाए. मानवाधिकार परिषद ने लीबिया में एक साल तक जांच करते रहने की मांग की है. मिस्र में विरोध प्रदर्शनों के बाद हुस्नी मुबारक के सत्ता से हटने पर लीबिया में प्रदर्शन तेज हुए लेकिन कर्नल गद्दाफी सत्ता से नहीं हटे हैं. नाटो विमान भी लीबिया में बमबारी कर रहे हैं.
रिपोर्ट: एजेंसियां: एस गौड़
संपादन: ईशा भाटिया