किर्गिस्तान ने रूस से सैन्य मदद मांगी
१२ जून २०१०ओश में कर्फ्यू लगाने के बाद किर्गिस्तान की अंतरिम सरकार की नेता रोजा ओटुबायेवा ने कहा, ''हालात शांत करने के लिए हमें बाहरी फौज की जरूरत है.'' ओटुबायेवा ने रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव से तुरंत फौज भेजने की अपील की है. उन्होंने कहा, ''हमने रूस से इस बारे में अपील की है. मैंने राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव को खत भेजा है.''
ओश में किर्गिज और उज्बेक समुदाय के लोगों के बीच दो दिन से हिंसक जातीय झड़पें हो रही हैं. अब तक 50 लोगों की मौत हो चुकी है और 650 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. तनाव और डर को देखते हुए उज्बेक समुदाय के हजारों लोग उज्बेकिस्तान की तरफ भाग रहे हैं. शुक्रवार को सीमा के पास एक बच्चा को भीड़ में कुचलकर मर गया.
सरकार ने कर्फ्यू लगाया है लेकिन तनाव अब भी चरम पर है. किर्गिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता राखतिमातिलो एखमेडोव ने बताया कि, ''स्थिति बहुत खराब है. सभी गलियों में आग लगी हुई है.'' रिपोर्टों के मुताबिक उज्बेक समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. समाचार एजेंसी एपी का कहना है कि हिंसक भीड़ पर काबू पाने के लिए सेना मशीनगनों का इस्तेमाल कर रही है.
किर्गिस्तान के एक टीवी चैनल का कहना है कि तनाव के चलते चीन और तजाकिस्तान से सटी सीमा को बंद कर दिया गया है. किर्गिस्तान में रूस और अमेरिका के सैन्य अड्डे हैं. किर्गिस्तान पूर्वी सोवियत संघ का हिस्सा था. करीब 53 लाख की आबादी वाले इस गरीब देश में फिलहाल राजनीतिक अस्थिरता है.
रिपोर्ट: एजेंसियां/ओ सिंह
संपादन: एन रंजन