जीवनदायी एसएमएस
२४ जुलाई २०१३ईस्ट तिमोर के पहाड़ी इलाके में गर्भवती महिलाओं की मुश्किल आसान करने के लिए एक नया प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, लीगा इनान. जो भविष्य की मांओं और दाइओं को मोबाइल फोन के जरिए जोड़ता है.
सेम नाम के गांव में प्रिंस ऑफ मोनाको मैटर्निटी अस्पताल में जब कोई जाता है तो पहली चीज जो दिखाई देती है वह इलेक्ट्रॉनिक औजारों का अभाव. न कोई कंप्यूटर है, न ईकेजी मॉनिटर हैं और न ही एसी कमरे. मशीन और तकनीक के नाम है तो बस मोबाइल फोन और एसएमएस. ऐसा ही एक एसएमएस आया है मना जुस्ता के लिए, जो 20 साल से मिडवाइफ यानी दाई का काम कर रही हैं. कहती हैं, "कि उन्हें एक महिला की डिलेवरी के लिए जाना है."
वह अपने साथियों को पूरी जानकारी देती है. महिला का नाम, पहचान नंबर देती हैं. कुछ ही मिनटों में पूरी टीम गर्भवती महिला की मेडिकल हिस्ट्री देखती है. क्लिनिक का स्टाफ गर्भवती महिला को फिर फोन करेगा ताकि उसे लाने ले जाने की सुविधा हो सके. हाल के सालों तक गर्भवती महिलाओं को इस स्थिति से अकेले ही जूझना पड़ता था.
मुश्किल रास्ते
पूर्वी तिमोर अपनी स्वास्थ्य प्रणाली को बेहतर करने की कोशिश 2002 से कर रहा है. 11 साल पहले देश को इंडोनेशिया से आजादी मिली.
सरकारी स्वास्थ्य सुविधा मुफ्त है लेकिन फिर से देश में प्रसव के दौरान मरने वाली महिलाओं की संख्या बहुत ज्यादा है. 12 लाख लोगों के देश में प्रति एक लाख प्रसव के दौरान 557 महिलाओं की मौत हो जाती है.
इनमें से सिर्फ 48 फीसदी प्रसव ही कुशल कर्मियों की मौजूदगी में होते हैं और 32 फीसदी क्लीनिक में. जबकि अधिकतर गर्भवती महिलाएं, 93 प्रतिशत प्रसव के बाद एक बार ही जांच के लिए गई हैं. यहां महिलाओं के औसतन छह बच्चे होते हैं.
मोबाइन मॉम्स प्रोजेक्ट गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए बनाया गया है. हालांकि कई महिलाएं स्वास्थ्य केंद्रों से बहुत दूर रहती हैं लेकिन फिर 69 फीसदी के पास मोबाइल फोन हैं और सिग्नल भी होते हैं.
लीगा इनान या मोबाइल मॉम्स कार्यक्रम भविष्य की माओं को सेहत से जोड़ता है. इस प्रोग्राम के लिए आर्थिक मदद यूएसएआईडी से मिलती है.
जीवनदायी एसएमएस
लीगा इनान सेवा की शुरुआत मानुफाही जिले से हुई. वहां पंजीकरण के बाद महिलाओं को हफ्ते में दो बार एसएमएस मिलता कि गर्भधारण के किस महीने क्या सावधानी रखऩी चाहिए.
एसएमएस एक ग्रुप को भी भेजे जा सकते हैं, इसके जरिए दाई अपने मरीजों को गांव में होने वाले टीकाकरण की जानकारी दे सकती है. गर्भवती महिला भी मुफ्त में सेवा केंद्र पर एसएमएस कर सकती है, इसके बाद दाई तुरंत फोन करती है.
इस सेवा का फायदा उठाने वालों का सबसे अच्छा उदाहरण है हेनेरा मोनिका डा कोस्टा. डा कोस्टा जब पहली बार गर्भवती हुई तो उनकी उम्र सिर्फ 19 साल की थी. प्रसूव के ठीक दो दिन पहले उन्हें बहुत कफ और तेज बुखार था. किस्मत से उन्हें लीगा इनान की वर्क बुक याद आई. उन्होंने तुरंत फोन किया और उनके लिए एंबुलेंस बुलवाई. माना जुस्ता ने बताया, "दाई वहां गईं और देखा कि उसकी हालत ठीक नहीं थी. प्रसूति से दो दिन पहले एंबुलेंस उन्हें अस्पताल ले गई. ऐसे कई मामले हैं जब एक एसएमएस जीवनदायी साबित हुआ है.
रिपोर्टः एमिली रिचमंड, समांथा अर्ली/एएम
संपादन: ओंकार सिंह जनौटी