नाइजीरिया में हिंसा जारी 200 की मौत
२८ जुलाई २००९नाइजीरिया एक बार फिर जल रहा है. दो-तीन दिनो के भीतर ही 200 से अधिक लोग मारे गये बताये जाते हैं.
इस बार हिंसा की आग से देश का उत्तरी भाग जल रहा है. वहां मुसलमानों का बहुमत है. एक उग्र इस्लामी पंथ बोको हराम मांग कर रहा है कि स्कूलों में पश्चिमी ढंग की धर्मनिरपेक्ष शिक्षा बंद कर दी जाये. सारे देश में शरियत क़ानून लागू किया जाये. बोको हराम का अर्थ है, शिक्षा पाप है. एक नाइजीरियाई पत्रकार के अनुसार "उन का कहना है कि पश्चिमी ढंग की शिक्षा शरियत और इस्लामी क़ानून के अनुकूल नहीं है. पश्चिमी ढंग की शिक्षा हमें इस्लामी आदर्शों से पथभ्रष्ट करती है."
बोको हराम पंथ के कुछ नेताओं की गिरफ्तारी के बाद सप्ताहांत को ऐसी हिंसी भड़की कि इस बीच नाइजीरिया के चार प्रांत उससे जूझ रहे हैं. सोमवार को बोर्नो प्रांत की राजधानी के एक पुलिस स्टेशन के अहाते में 100 अधिक लाशें बिछी हुई थीं. पुलिस बोको हराम कट्टरपंथियों का मुख्य निशाना बन गयी है. बोर्नो के अलवा बाउची, कानो और योबे में भी इस्लामवादियों और सुरक्षाबलों के बीच खूब मारकाट हुई. राष्ट्रपति उमारू यार'अदुआ ने सोमवार को इन सभी प्रांतों में सुरक्षाबलों को पूरी तरह सतर्क कर दिया.
हताहतों की सही संख्या कोई नहीं जानता. अकेले मृतकों की संख्या रविवार के बाद से कम-से-कम 200 हो गयी बतायी जाती है. रात का कर्फ्यू होने के बाद भी रात को पुलिस पर हमले हो रहे हैं. बताया जाता है कि इस बीच ईसाई गिरजाघरों को भी जलाया जाने लगा है.
इस बीच अपने आप को तालिबान कहने वाला एक और गुट इस मारकाट में कूद पड़ा है. स्थिति पिछले वर्ष नवंबर की याद दिलाने लगी है, जब ईसाइयों और मुसलमानों के बीच दंगों में क़रीब 700 लोग मारे गये थे.
नाईजीरिया के 36 में से 12 राज्यों में 1999 से जब शरियत को लागू किया जाना शुरू हुआ, तब से वहां सांप्रदायिक हिंसा भी बढ़ती गयी है. बोको हराम पंथ 2004 में अस्तित्व में आया. तभी से वह पूरे नाइजीरिया में शरियत लागू करने और उसे एक इस्लामी धर्मराज्य बनाने के लिए लड़ रहा है.
रिपोर्ट- राम यादव
संपादन- उज्ज्वल भट्टाचार्य