रूस में रामलीला के 50 साल
१९ दिसम्बर २०१०80 साल की उम्र पार कर चुके जेन्नाडी मिखाइलोविच पेचनीकोव यूरोप में रामायण के राम की भूमिका निभाने वाले इकलौते पेशेवर कलाकार हैं. उन्हें वो लम्हा भी याद है जब भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने खुद थियेटर में जा कर रामलीला देखी थी. स्थानीय गैर सरकारी संगठन द परेड ऑफ रसियन इंडियन हेरीटेज ने रूसी यूथ थिएटर में शुक्रवार को एक समारोह मनाया. इस में रूस के सांस्कृतिक मामलों के उपमंत्री आंद्रेई बुसिगिन भी शामिल हुए. बुसिगिन ने कहा कि केवल रूस ही एक ऐसा देश है जहां रामायण जैसे महाकाव्य का पिछले 50 सालों से मंचन हो रहा है. ऐसा इस वजह से है क्योंकि हमारी सोच मिलती है.
रूस में 1960 से ही रामलीला हो रही है और संस्कृति मंत्री मानते हैं कि पिछले 20 सालों से बिना रूके रामलीला के मंचन एक बार फिर रूस में एक बार फिर लोकप्रिय हो गया है. वो ये भी मानते हैं कि रामायण जैसा महाकाव्य कभी मर नहीं सकता.पेचनीकोव की भूमिका का जिक्र करते हुए रूस में भारत के राजदूत अनिल त्रिगुणायत ने कहा कि भारत उनकी कला का सम्मान करता है.
पेचनीकोव को पद्मश्री पुरस्कार से भी नवाजा गया है. जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी से अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए पेचनीकोव ने कहा कि उन लोगों ने रामायण के रूसी संस्करण को खूब सराहा और भारत में बिना अनुवाद के ही इसे पेश किया गया. लखनऊ, पटना और दूसरे शहरों में भी लोगों को इसे समझने में कोई दिक्कत नहीं हुई और रामलीला के दौरान लोग राम के रूप में उनका आशीर्वाद लेने भी आते थे.
पेचनीकोव ये भी मानते हैं कि राम की भूमिका निभाते निभाते उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई. पेचनीकोव कहते हैं,"पहली बार मैं जब भारत गया तो मुझे समझ में आ गया कि हमारे नाटक के जो प्रमुख पात्र थे राम, सीता और हनुमान उनकी भगवान के रूप में पूजा होती है.रामायण भारत में सुशासन का एक प्रतीक है जो आधुनिक समाज में मुमकिन नहीं हो पा रहा."
पेचनीकोव ने बताया कि रूस के कुछ स्कूलों में रामायण के कुछ हिस्सों का मंचन होता है जो रूस के लोगों को खूब पसंद है. रूस में पहली बार रामलीला होने के 50 साल पूरे होने पर हुए जलसे में दोनों देशों के स्कूली बच्चों ने भी हिस्सा लिया और रंगारंग कार्यक्रम पेश किया.
रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन
संपादनः एस गौड़